जब बाबू 50000 रुपए का बैल लेकर आया तो सारे गांव चर्चा होने लगी कि आस पास के गांवों में यह बात फेल गई कि इस बेल जैसा कोई बेल नही है । बेल इतना बलवान है कि इसकी तुलना तुम हाथी से क्र सकते हो और देखने में किसी सफेद घोड़े जैसा है ।ऐसी लोगों में बाते हो रही थी ।
पडोसी उस बैल को देख- देख कर जाने लगे यहां तक दूसरे गांव के लोगों की भी काफी भीड़ थी ।
बाबू के यहां लोगों का आना जाना लगा रहता था । सभी उसकी करने लगे
और कहने लगे की इसमें ऐसी क्या खूबी है कि तुमने इसके 50000 रुपए
दिये । वैसे यह देखने में तो काफी अच्छा है क्या इसमें कोई और गुण भी है ।
बाबू – इसने आस-पास के गाँवों में सभी प्रतियोगता जीती है और यह अभी तक
नहीं हारा है।
धीरे-धीरे भीड़ कम होने लगी और 2 महीने बीत गए।
एक दिन बाबू का एक पडोसी अपने खेत पर किसी कम से गया और उसने
देखा की बाबू उसी 50000 के बैल से खेत जोत रहा है ।
उस पडोसी पूछा – तुम इतने सुंदर और कीमती बैल से खेत क्यों जोत जबकि तुम्हारे पास और भी बैल हैं ।
बाबू ने कहा कि दौड़ प्रतियोगिता में अभी कुछ महीने बाकी है अगर में इसे केवल घर पर ही
रखता तो यह आलसी व सुस्त हो जाता । खेत जोतने से यह सुस्त नही होगा और नही आलसी ।
मेरे पास और भी बैल है पर मैं इस बैल से कभी कभी हल जोतता हूं केवल इसके भले के लिए ।
हल में चलने से इसके पैर मजबूत होंगे जो इसे दौड़ में जितने मे मद्त करेंगे । इसे हल में चलने का तो दुःख तो मुझें भी होता है पर यह इसके लिए ही फायदे बंद है । यही महेनत इसे इस बार जिताएगी ।
और बाद में इस बार की बेल दौड़ भी बाबू के बेल ने जीती ।
कभी कभी हमें अपने को बहेतर बनाने के लिए कुछ ऐसा करना पड़ता है जो हमारे Level. का नही होता पर
हमारे लिए बहुत जरूरी होता है ।
जिसका फायदा हमें बाद में मिलता है

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