जीवान की समस्या से छुटकारा

देव के सामने छोटी सी भी समस्या ( Problem ) आती तो वह हार मान लेता और हर समय परिस्थिति ( Situation ) और दूसरों को दोष देने लगता और समस्याओं से भागने लगता।
परन्तु जब वह अपनी कक्षा में फेल हो गया और सभी बच्चे पास हो गये । तो वह अंदर तक बिल्कुल टूट गया और अपने पापा से कहने लगा की मुझे लगता है में अपने जीवन में कुछ नही कर सकता हूँ मेरे अंदर कोई भी योग्यता नही मुझे नही लगता कि मैं अपने जीवन में कभी भी कही भी सफल नही हो पाऊंगा ।
अब मुझे लगता है कि मेरा पूरा जीवन बेकार हैं देव के पापा लकड़ी काटने का काम करते थे
उन्होंने कहा बेटा कल रात अंधी तूफान आयी थी जिससे जंगल में काफी पेड़ टूट गये होंगे और आज तुम मेरे साथ चलो और लकड़ी कटवाने में मेरी मदद कर देना ।
देव और उसके पापा जंगल की तरफ चल दिये और जंगल में कुछ दूर चलने पर एक छोटा सा पेड़ टुटा हुआ मिला
देव के पापा उस पेड़ के एक लकड़ी की कुल्हाड़ी (Axe) से काटने लगें पाँच छः चोट मारने पर वह कुल्हाड़ी टूट गई।और देव के पापा कहने लगे की अब क्या करूँ ।यह कुल्हाड़ी तो टूट गई अब क्या करूँ ।
देव ने पापा से कहा कि कभी लकड़ी की कुल्हाड़ी से भी पेड़ कट सकता हैं इसके लिये तो लोहे की मजबूती और तेज धार की कुल्हाड़ी चाहिये ।आप अपनी लोहे की कुल्हाड़ी से काटो वह पेड़ आसानी से जाएगा

यह सुनकर उसके पिता ने कहा -बेटा यह तुम्हारे साथ भी हैं तुम भी अभी इस लकड़ी की कुल्हाड़ी की तरह हो जो एक छोटी से पेड़ को नही काट पाई और खुद टूट गई ।तुम भी छोटी सी समस्या ( Problem ) आने पर टूट जाते हो ।
बेटा जीवन में बहुत बड़ी – बड़ी समस्या आती हैं और एक साथ बहुत ज्यादा समस्या आ जाती हैं
परन्तु यदि तुम इनसे एक बार हार मनाना शुरू कर दोगे तो यह तुम पर बहुत ज्यादा हावी हो जाएंगी।
कोई भी आदमी जन्म से सफल या असफल नही होता और ना ही कमजोर या मजबूत होता हैं

यदि आदमी एक बार समस्या से भागना चालू कर देता हैं तो धीरे – धीरे उस के मन में यह डर बैठ जाता हैं कि वह इसका सामना नही कर सकता हैं की वह कमजोर हैं ।

परन्तु यदि तुम समस्या का डटकर मुकाबला और सामना करोगे तो अपने और दूसरों के अनुभवों ( Experiences ) से सीखोगे तो बड़ी से बड़ी समस्या भी आसानी से हल हो जाएगी ।
क्योंकि हार और जीत फैसला समस्या के छोटे या बड़े होने से नही बल्कि अपने से होता हैं यदि तुम अपने मन से हार मान लोगे तो समस्या का सामना करे बिना ही हार जाओगे । अगर तुम्हारा मन लोहे की कुल्हाड़ी की तरह होगा तो तुम समस्या रूपी बड़े से बड़े पेड़ को काट सकते हो ( किसी भी समस्या का सामना कर सकते हो )
यदि मन में सोच लोगे की जीतना हैं कोई ने कोई रास्ता या तरकीब अवश्य निकलेगी ।
और जब तुम सफल हो जाओगे इसलिए अपने मन को लकड़ी की कुल्हाड़ी न बनने दो इसे तुम लोहे की कुल्हाड़ी की तरह मजबूत बनाओ जो समस्याओं को काट गिराए ।
देव की समझ में आ गया कि हमे अपने विचारों को मजबूत बनाना चाहिए जो किसी भी समस्या का सामना

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