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स्वामी विवेकानन्द एक दिन नदी किनारे टहल रहे थे । तभी अचानक उन्होंने कुछ लड़कों को नदी में पत्थर फैकते देखा । जब वे उन लड़कों के पास पहुँचे तो उन्होंने देखा की वो लड़के एक पत्थर में निशाना लगाने की कोशिश कर रहे थे और किसी भी लड़के का निशाना सही जगह नही लग रहा था बार बार कोशिश करने पर भी वे एक बार भी सही निशाना नही लगा पाए । तभी उन लड़कों में से एक लड़के का ध्यान पास खड़े स्वामी जी के पास गया और वह स्वामी जी से कहने लगा स्वामी जी आप भी एक बार कोशिश करें विवेकानन्द ने कुछ पत्थर उठाये और एक – एक करके मारने लगें और सभी लड़के देख कर हैरान हो गये की स्वामी जी का एक भी निशाना नही चूका और सारे पत्थर सही के सही निशाने पर लगे ।
इस पर हैरान होकर लड़कों ने स्वामी जी से उनके पक्के निशाने का राज पूछा।
स्वामी जी ने कहा – जब मैने पत्थर पर निशाना लगाया तो मैं केवल निशाने के बारे में सोच रहा था और कुछ नही ।
निशाने का सीधा संबंध हमारे व्यक्तित्व से है । सही निशाना लगाना ही हमारे मन की शक्ति को दिखाता है
जितना हमारा मन केन्द्रित लक्ष्य पर होता है उतने ही हमारे फैसले सही और साफ होते हैं जितना हमारा मन मजबूत होता हैं उतना कम भटकता हैं उतनी ही सफलता हमें प्राप्त होती हैं ।

सफलता का सीधा सम्बन्ध हमारे विचारों व ध्यान से हैं । जितना हम अपने जीवन में लक्ष्य के प्रति फोकस करेंगे हमे उतनी ही जल्दी सफलता मिलेगी ।

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