लगातार मेहनत का लाभ

रघु पढ़ने में होशियार था परन्तु उसकी एक बुरी आदत थी की वह ज्यादातर समय खेल में और इ धर उधर बर्बाद कर देता था । इस कारण उसके पिता बहुत परेशान रहते थे और वह हमेशा रघु से कहते थे की बेटा हमे लगातार पढ़ाई करते रहना चाहिये और किसी भी काम को समय समय पर करते रहना चाहिए। परन्तु रघु हमेशा उनकी बात टाल देता था  जब रघु के exam में नम्बर कम आने लगे तो उसमें पिता जी को यह चिंता और अधिक सताने लगी और उन्होंने रघु को सबक सिखाने की सोची  रविवार की सुबह जब रघु और उसके पापा दोनों की छुट्टी थी और वो सुबह का नाश्ता करने बैठे तो रघु के पाप ने कहा चलो बेटा आज नये बर्तनों में खाते हैं जो स्टोर रूम में रखे हैं रघु बहुत खुश हो गया और दोनों स्टोर रूम में चले गये वहाँ से जब रघु के पापा ने बर्तन निकाले तो वे रखे रखे बहुत गंदे हो चुके थे रघु ने कहा पापा इन बर्तनों में खाना नही खा सकता ये तो बहुत गन्दे  हो चुके हैं इन तो कई बार साफ करना पड़ेगा  जब खाना खा सकते हैं

इ पर रघु के पापा ने कहा बेटा जिस तरह से ये बर्तन नये होने पर भी रखें रखे गंदे हो गये हैं और खाना खाने के  लायक नही रहे और रसोई में जो बतर्न पुराने होते हुये भी रोज काम में आने से साफ और खाना खाने योग्य हैं इसी प्रकार से यदि हम कितने भी होशियार  और योग्य हो परन्त यदि हम अपने काम  को बार बार नही करते रहेंगे तो सफल नही हो पाएंगे

 

जीवन में सफलता पाने के लिये निरन्तर काम करते रहना चाहिये यदि तुम निरन्तर काम नही करोगे तो चाहे हम कितने भी योग्य और कितने भी बुद्धिमान हो सफलता हमसे हमेशा दूर रहेगी ।

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