हे गुरुदेव मेरा जीवन बेकार है मैं किसी काम के योग्य नहीं हूं कभी -कभी तो मुझे लगता है कि भगवन ने मुझे गलती से इंसान का जन्म दे दिया है मेरे जीवन का कोई महत्त्व नहीं है यह बेकार है और कभी – कभी तो लगता है कि मुझे खुद को मार डालना चाहिए । बताओ गुरुदेव मैं क्या करूँ ।

गुरु नानक ने उसे एक पत्थर  दिया और कहा कि इस पत्थर को ले जाओ और अलग – अलग  व्यक्त्ति () के पास जाकर इसकी कीमत के बारे में पूछना पर ध्यान रहे किसी को इस बेच मत देना ।

दीनू उस पत्थर को लेकर बाज़ार की तरफ चल दिया ।

सबसे पहले उसे एक  मजदूर हुआ दिखाई दिया दीनू ने उससे पत्थर को दिखा कर पूछा की भाई तुम मुझे इस पत्थर के बदले में क्या दे सकते हो ।

मजदूर – भाई यह पत्थर मेरे किसी काम का नहीं है मैं तुम्हें इसके बदले में कुछ नहीं दे सकता हूँ ।

यह सुनकर दीनू  पत्थर लेकर आगे चल दिया । कुछ दूर चलने पर उसे एक सब्जी बेचने वाला मिला और दीनू ने उसे पत्थर दिखा कर पूछा ।

दीनू – भाई मैं यह पत्थर बेचना चाहता हूँ तुम इस के कितने पैसे दे सकते हो ।

सब्जीवाला – पत्थर को हाथ में लेकर बोला वैसे तो यह मेरे किसी काम का नहीं पर फिर भी यह कुछ चमकदार है   तो तुम चाहो तो इसके बदले में कुछ सब्जी ले सकते हो इस से मेरा बच्चा खेल लेगा ।

दीनू ने पत्थर उससे लेकर आगे चल दिया ।

कुछ देर चलने पर एक बाजार में पहुँच गया । वहाँ उसे एक सुनार की दुकान दिखाई दी ।

दीनू ने सोचा क्यों न एक बार इस सुनार से भी इस का मोल भाव करा लिया जाए ।

और उसने सुनार को वह पत्थर दिखा कर पूछा भाई तुम इस की क्या कीमत दे सकते हो ।

सुनार ने वह पत्थर ध्यान से देखा और सोचने लगा यह तो एक हीरा है और शायद इसे इसका अंदाजा नहीं है ।

इसलिए सुनार ने कहा कि यह   हीरा एक कीमती हीरे की नकल है मैं तुम्हें इसके 10000 रुपये दे सकता हु

जब उस ने मना कर दिया तो सुनार ने उसे  20000 देने के लिए कहा ।

दीनू ने वह पत्थर लिया और नगर की सबसे बड़ी शाही  दुकान पर गया । और वहाँ भी उसने उस पत्थर को दिखाया और बोला तुम मुझे इस के बदले क्या दे सकते हो

नौकर ने शाही  सुनार को बुलाया  और वह पत्थर दिखाया सुनार ने ध्यान से उसे परखा और पूछा यह तुम्हें कहा से मिला यह पत्थर नहीं हीरा है और यह अनमोल है ऐसा हीरा या तो राजा के मुकुट में है

या ये है तुम इसके बदले में जो भी चाहो वो मिल जाएगा ।

ऐसा सुनकर उसने हीरा लिया और वापस गुरु नानक के पास चल दिया

और सारी कहानी आकर गुरु जी को सुनाई

इस पर गुरु जी ने कहा तुम भी इस हीरा की तरह ही हो बस तुम्हें अपनी कीमत जाननी है

जितनी कीमत तुम अपनी मान लेते हो बस उतने ही हो जाते हो

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