Moral of pahalwan story in Hindi

Moral Stories In Hindi
आज हम आपके लिये एक सच्ची Moral Story लेकर आये हैं

रामवीर पहलवान एक आँखडे में गया वहाँ, पहुँच कर
वह उस अखाड़े के उस्ताद खिलिपा से मिला और बोला – उस्ताद जी मुझे कुश्ती सीखनी हैं। क्या आप मुझे कुश्ती सीखा देंगे। मैं सिखने में मन लगा दूँगा । जरा सी भी कमी नही छोडूंगा और न ही कभी आलस्य करुगा ।
उस्ताद – मैं तुम्हे पूरी तरह से कुश्ती सीखा दूँगा, परन्तु इसमें तुम्हे 6 महीनें लगेंगे और तुम्हे मेरी हर बात माननी पड़ेगी मेरे अनुसार ही तुम्हे अपनी कुश्ती की तैयारी करनी पड़ेगी। रामवीर – मैंने पहले भी आधे से दांव पेंच कुश्ती के सीखी हुयी हैं तो मुझे कितना समय लगेगा।
उस्ताद – तो फिर तुम्हे सीखने में 1 वर्ष का समय लगेगा ।
रामवीर पहलवान – उस्ताद की बात सुनकर बहुत आचार्य-चकित हुआ। रामवीर कहने लगा की उस्ताद मुझे लगता है कि आप ने कुछ सुनने में गलती की है मैं बोल रहा था कि मैंने पहले से ही कुछ % कुश्ती सीखी हुई हैं ।
मुझे तो कम समय लगना चाहिये,जबकि आप ज्यादा बता रहे हो।
उस्ताद – तुम्हारी बात समझता कि तुम क्या कह रहे हो पर मैं भी जो कह रहा हूं वही सही है ।
रामबीर – मैं समझा नही उस्ताद जी मुझे आप सही तरह व विस्तार से बताए ।
उस्ताद – मेरे साथ चलो, वे उसे एक गन्दे तालाब के पास लेकर गये। और बोले इसमें हमे साफ पानी भरना हैं।तो इसमें से हमे पहले गन्दा पानी निकलना होगा,और फिर साफ पानी बिना किसी अन्य मेहनत के भर सकते हैं।
उसी तरह तुम खाली नही हो ,तुमने कुछ कुश्ती सीखी हुयी हैं पहले जो तुमारी गलतियां हैं उन्हें निकालना पड़ेगा। उसके बाद में तुम्हे नई कुश्ती सिखाई जायेगी। अगर हमारा ज्ञान व् शिक्षा सही न हो, तो हमे समझने में साधरण से भी ज्यादा समय लगता हैं।
रामवीर पहलवान उस्ताद(खलिपा) जी की बात को समझ गया और बोला में जल्द ही अपनी गलतियों और बुराईयों को खाली करूंगा।
अच्छी और सही शिक्षा ग्रहण करूंगा।
मैं आप के कहे अनुसार ही काम करुगा व कुश्ती सीखूंगा ।
Moral of story हमे बताती है कि हम जब तक कोई भी सही शिक्षा ग्रहण नही कर सकते हैं जब तक की पुराने गलत विचारों को और अपने अंदर की गलतियों को पहचान कर उन्हें सही नही कर लेते ।

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