हमारे मन का स्वाभाव

जब राजा जय सिंह को यह पता चला की उनके राज्य में एक ऐसा साधू है जो लोगो की हर बात का जवाब दे देता है
तो एक दिन राजा ने सोचा की क्यों न एक बार उस साधु से मिला जाये और अपने कुछ सवालों के जवाब हासिल किये जाएं ।
यह सोचकर राजा अपने कुछ मंत्रियों के साथ मिलकर साधु से मिलने पहुँच गया ।
और साधु को प्रणाम करके बोला – हे साधु महाराज मैंने आपका नाम बहुत सुना है कि आप सभी की समस्याओं का समाधान कर देते ही मेरी भी कुछ समस्या है जिस के समाधान के लिए मैं आपके पास आया हूँ ।
साधु – बोलो राजन क्या समस्या है ?
राजा – बाबा मैं आपसे अकेले मैं यह समस्या पूछना चाहता हूँ ।
साधु – चलो खेतों की तरफ घूमने चलते हैं वही पर रास्ते में तुम अपने समस्या बता देना ।
यह कहा कर दोनों खेतों जी तरफ चल दिए ।
राजा – बाबा मेरा मन हर समय भटकता रहता है यह ज्यादातर इधर उधर की बातों में लगा रहता है जिस से मैं अपने काम पर ठीक तरह से ध्यान नहीं दे पता हूँ ।
तभी साधु को एक किसान दिखाई दिया जो अपने खेत में पानी देने वाली नाली को ठीक कर रहा था । साधु ने किसान से पूछा की बेटा तुम नाली क्यों ठीक कर रहे हो ऐसी ही नाली से खेत में पानी क्यों नहीं भरते ।
किसान ने कहा – बाबा अगर में इस नाली की मरम्मत नहीं करूँगा तो आधा पानी इधर उधर बह जायेगा और मेरा नुकसान हो जायेगा ।
यह सुनकर साधु राजा की तरफ देखकर बोले – राजन इस नाली की तरह हमें भी समय – समय पर अपने अंदर अच्छी आदत बनाते रहना चाहिए और बुरी आदत और भटकाव वाली चीजों से दूर रहना चाहिए तभी हम अपने काम पर ठीक तरह से ध्यान दे पाएंगे और जो भी हमारे जीवन में लक्ष्य हैं उन्हें पूरा कर पाएंगे । वरना हमारी ज्यादातर समय इधर उधर और बेकार के कामों में ही बर्बाद हो जाएगा । और अपने जीवन में कोई बड़ी Success सफलता हासिल नहीं कर पाएंगे ।

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