विचारों की ताकत

सुमित हमेशा की तरह अपनी ड्यूटी से घर आ रहा था आज उसका मुड़ कुछ ख़राब था जब वह रेलगाड़ी में चढ़ा तो रोज मिलने वाले उसके दोस्तों ने पूछा क्या – क्या हुआ आज दुखी लग रहे हो ?

सब ठीक तो है आज फिर कुछ हो गया क्या ?

सुमित – यार मेरी तो किस्मत ही ख़राब है ऐसा लगता है कि सारी दुनिया ही ख़राब है इसमें सभी लोग बेकार है कभी – कभी तो ऐसा लगता है कि सभी ने मेरे खिलाफ एक साजिश रच रखी है इसे दुखी करना है और तो और मेरे घर के लोग भी कुछ कम नही है । उन्होंने भी सुबह शाम मुझ से मानो लड़ने की कसम खा रखी है।

यार कोई तरीका बताओ कि मेरा जीवन भी सुख से बीते ।

 

आज उसके दोस्त अमोल के साथ उसके अंकल भी सफर कर रहे थे । उन्होंने कहा बेटा  क्या तुम्हें सच में ऐसा लगता है

 

अमोल के अंकल बोले बेटा अगर बुरा न मानो तो में तुम्हे एक कहानी सुनाता हूं  रीमा की नई नई सादी हुयी थी जब वह अपने सुसराल से वापिस आयी  तो रीमा अपनी

से  माँ ससुराल के हर व्यक्ति की बुराई करने लगी खासकर अपनी सॉस की । रीमा ने कहा मेरी सॉस हर काम में बुराई निकलती हैं के चाहे कितना भी अच्छा खाना बना दू उसे पसंद नही आता हैं मेरे द्वार किये गये हर काम की बुराई करती हैं वह 24 घण्टे मेरे ऊपर नजर रखती हैं जैसे की में उसकी नोकरानी हूँ मुझे उससे छुटकारा  नही मिला तो में कभी भी अपने ससुराल नही जा उगी

यह सुनकर रीमा की माँ ने कहा में तुम्हें एक धीमा जहर देती हूं उसे तुम हर रोज अपनी सॉस के खाने में मिला देनावह तीन महीने में काम करेगा परन्तु जब तक तुम उसकी हर बात को मनाना । और अपने मन में उसके लिये कोई भी बुरा भाव मत रखना उसकी सेवा करना ताकि तुम पर कोई शक ना करें ।

यह कहकर रीमा की माँ ने उसे एक डिब्बा में दवाई दे दी और रीमा अपने ससुराल चली गयी

अपनी माँ के अनुसार बताये सभी काम करने लगी  जब तीन महीने में बहुत कम समय रह गया तब रीमा अपनी माँ के पास आयी और कहने लगी माँ किसी भी तरह मेरी साँस को बचा लो और उस जहर को काटने की दवा दे दो में नही चाहती वह मरे रीमा की माँ ने कहा ऐसा क्या हुआ तीन महीने पहले तो तुम उसे मारना चाहती थी ।उसने कहा जो में सोचती वह बिलकुल गलत था कमी उनमे नही थी कमी मेरे व्यवहार में थी जैसे ही मेने अपना व्यवहार सही किया तो मुझे पता चला की वो बहुत अच्छी व नेक हैं ।

माँ बोली बेटी मुझे पता था कि ऐसा ही होगा इस लिये मेने तुम्हे जहर नही चूर्ण दिया था रीमा की खुशि का अब ठि काना नही रहा

अब अंकल बोले ऐसा ही तुमारे  साथ हुआ हैं तुम अपने व्यव्हार को सुधारो धिरे धिरे तुम्हें लोगो की अछाई समझ आयेगी । उस कहानी से सुमित ने प्रेरणा ली

वह खुश होकर अपना सफर करने लगा।

 

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