Swami vivekanand self-improvement story in Hindi

एक बार एक अंग्रेज ने स्वामी विवेकानंद जी से पूछा की स्वामी जी आप हमेशा इतने व्य्वस्थित क्यों रहते हो। और प्रत्येक काम को अनुसान से क्यों करते हैं। क्या इन बातों का असर आप के self confidence पर भी होता है । स्वामी विवेकानन्द जी ने कहा में आपको इस सवाल का जवाब शाम को दूँगा। जब वह अंग्रेज शाम को स्वामी जी के पास आया तो स्वामी जी उसे एक बड़े हाल में ले गये ।जहाँ चारो तरफ कागज, कपड़े और भी बहुत सारी चीजें बिखरी हुयी थी।
इसके बाद स्वामी विवेकानंद जी उसे दूसरे हाल में लेकर गये जो उस हाल के आधे के बराबर था।
परन्तु उसमे सभी चीजें अपने उचित स्थान और व्य्वस्थित स्थान पर रखी हुयीं थी।दोनों हाल दिखने के बाद स्वामी जी ने पूछा तुम्हे कौन से कमरे में रहना चाहोंगे।
अंग्रेज ने कहा में छोटे वाले हाल में रहना चाहुगा स्वामी जी ने पूछा ऐसा क्यों?
स्वामी जी बड़ा कमरा तो तहस-नहस हुआ पड़ा हैं।
इस पर स्वामी जी ने कहा यही तुम्हारे सबुह के सवाल का जवाब यही हैं।
किसी भी काम में बड़ा या छोटा होने से सफलता से नही मिलती परन्तु इस से मिलती हैं कि हम उसे कितने अनुसासन और व्यवस्तिथ से करते हैं
हमारा काम बड़ा हो या छोटा उससे कोई फर्क नही पड़ता बस काम व्यवस्थित होना चाहिए अगर काम अस्त व्यस्त होगा तो उसमें हानि हो सकती हैं यदि काम व्यवस्थित होगा तो सुंदर और अधिक लाभदायक होगा है। जब हमारा काम व्यवस्थित होगा तो हम में self confidence अपने आप आ जाता है । जितनी हमारे अंदर कम कमी होगी उतना ही हमारा self confidence बढेगा ।

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