Moral Story in Hindi
चिंकी चिड़ियां एक हाथी से बहुत परेशान थी।
जब भी वह चिंकी के रहने वाले पेड़ के पास से होकर गुजरता तो जान बूझ कर उसके पेड़ को हिला देता जिससे चिंकी का घोसला डगमगा जाता कभी – कभी तो उसके अंडे भी गिरकर फुट जाते थे । जब चिंकी ने उस हाथी कहा कि वह थोड़ा बच कर चलें।तो हाथी ने कहा कि मे तो ऐसे ही चलूँगा तुम जो कर सकती हो मेरा कर लो।
चिंकी इस बात की शिकायत लेकर उस हाथी के झुण्ड के दूसरे सदस्यों हाथियों के पास गई।पर सभी ने कहा की हम कुछ नही कर सकते और
जब चिंकी ने ऐसा सुना तो बहुत चिंतित हो गई।और उदास हालात में अपने घोंसले में आकर बैठ गयी।
तभी उधर से उसकी एक मित्र स्वीटी चिड़िया आ गई
चिंकी को उदास हालात में देखकर पिंकी ने उससे पूछा की क्या बात हैं तुम तो सदा खुश रहती हो फिर आज इतनी दुखी क्यों हो।
चिंकी क्या बताऊ में एक हाथी से बहुत ज्यादा परेशान हूँ। वह जब भी इधर से गुजरता हैं तो इस पेड़ को बुरी तरह से हिला देता हैं। मुझे डर हैं किसी दिन मेरे बच्चे मर जाएंगे।
यह सुनकर पिंकी ने कहा बस दोस्त इतनी सी बात हैं।
अब जब भी वह हाथी तुम्हारे पेड़ को हिलाये तो तुम मेरे पास आ जाना हैं यह कहकर स्वीटी चली गई

अगले दिन जब हाथी ने आकर पेड़ को हिलाया तो चिंकी जल्दी से उड़कर स्वीटी के पास चली गयी और उससे कहा कि दोस्त वह हाथी आ चुका हैं।
यह सुनकर स्वीटी ने अपने झुण्ड को लेकर चिंकी के साथ उड़कर उसके घोसले पर आ गई
और उस हाथी के दोनों कानो में जोर – जोर से चिल्लाने लगी। हाथी का सिर फटने लगा और कहने लगा की मुझे अबकी बार छोड दो ,आगे से कभी भी किसी भी पक्षी या जानवर को तंग नही करूंगा।
चिंकी ने सभी चिड़ियों का धन्यवाद किया
Moral Of Story हमे अपने जीवन में हमेशा अच्छे दोस्त बना कर रखने चाहिये क्योंकि जब भी हम पर मुसीबत आ पड़ेगी तो सच्चे दोस्त हमेशा हमारे साथ होते हैं और हमे भी अपने दोस्तों के काम आना चाहिये दोस्तों का साथ कभी नही छोडाना नही चाहिये चाहे सुख हों या दुःख हो ।

5 COMMENTS

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here